तुर्कहा गाँव के मंटू भारती  हत्या कांड में शमशाद व सरफराज को आजीवन कारावास

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कुशीनगर

कुशीनगर जनपद के खडडा क्षेत्र के तुर्कहा गाँव निवासी मंटू भारती के  चार साल पुराने हत्या मामले में तुर्कहा के शमशाद व खडडा नगर के सरफराज  को महराजगंज कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

यह था मामला—

चार साल पहले 8 जून 2021 को मंटू भारती अपने रिश्तेदार की बारात में शामिल होने महराजगंज जनपद के थाना निचलौल के ग्राम खम्हौरा के टोला बंजरिया गये थे। द्वार पूजा के बाद मंटू गायब हो गये थे। चार दिन बाद, मंटू का शव गन्ने के खेत से बरामद हुआ था, जिसमें चाकू मारकर हत्या की गई थी।

पिता की तहरीर पर निचलौल पुलिस ने मुकदमा दर्जकर विवेचना शुरू की, जिसमें तुर्कहा गाँव निवासी सरफराज और खडडा कस्बा निवासी शमशाद का नाम सामने आया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में दोनों ने बताया कि शमशाद के भाई की मौत हुई थी, जिसमें मंटू का हाथ होने का शक था। इसी के प्रतिशोध में बारात से मंटू को झांसा देकर कुछ दूर एक ईट भट्ठे के पास ले गये और चाकू मारकर हत्या कर दिए थे।

महराजगंज कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 45-45 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

शोकाकुल मंटू की मां व बहन

परिजन बोले आजीवन कारावास की सजा तो ठीक है ,परंतु फांसी होती तो कलेजा ठंडा होता—-

मंटू की मां रम्भावती विलखते हुए कहती हैं , “बेटा बारात करने गया था, लेकिन हत्यारों ने निर्ममता से मारकर मेरी कोख सूनी कर दी। फांसी पर झूलते देखती तो कलेजे को ठंडी मिलती।”

मंटू के पिता व छोटा भाइ

पिता शारदा प्रसाद ने बताया, “सजा सुनकर संतोष जरूर है, लेकिन फांसी होती तो अच्छा रहता।मंटू की शादी के लिए सपना संजोए था ,सोचा था बुढापे का सहारा बनेगा,परंतु हत्यारों ने मार डाला।

बहन आंचल ने कहा, “भैया की हत्या करने वालों को सजा मिलने से कुछ संतोष मिला, लेकिन असली खुशी तब होती जब दोनों को फांसी होती।”आज भी भैया की याद  आती है ,तो कलेजा फटने लगता है।

छोटे भाई सिन्टू ने कहा, “भैया को मारने वाले को सजा मिलना ठीक है, परंतु फांसी मिलनी चाहिए थी।”

बाबा की रिपोर्ट

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Author: News Alert 9

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