सरकारी सिस्टम का अजब गजब कारनामा। चार वर्ष पहले मरे युवक से समाज को कैसे खतरा हो सकता है।आखिर आजतक कैसे चल रहा था मुकदमा । सवालों के घेरे में सिस्टम–
Newsalert9 (कुशीनगर)
बाबा की रिपोर्ट —–
कुशीनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स को गुंडा घोषित कर जिला बदर कर दिया गया है, जबकि वह शख्स 4 साल पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। जी हां, आपने सही पढ़ा! हर्षित सिंह नामक युवक की मौत 2021 में एक बाइक दुर्घटना में हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसे गुंडा घोषित कर दिया गया है।
क्या है मामला?
एडीएम न्यायिक प्रेम कुमार राय ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत जमानती वारंट जारी होने के बावजूद न्यायालय में अनुपस्थित रहने पर हर्षित सिंह सहित चार लोगों को गुंडा घोषित किया है। इनमें मुन्ना पुत्र रामदास ग्राम रामपुर गोनहा थाना खडडा, वाहिद रजा पुत्र मोनू शेख ग्राम लाला गुरवलिया थाना तुर्कपट्टी और राजा शेख पुत्र सफीक ग्राम लाला गुरवलिया थाना तुर्कपट्टी भी शामिल हैं।
कैसे हुआ यह संभव?
हर्षित सिंह की मौत के बाद भी खडडा पुलिस ने मामला बंद नहीं किया ,और बिना किसी तफ्तीश के पुराने रिपोर्ट को रिपिट कर गुंडा एक्ट की कार्यवाई का कोटा पूरा कर दिया ।चार वर्ष पहले मरे युवक के खिलाफ वारंट जारी होना और फिर उसे गुंडा घोषित करना कई सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन की ओर से कोई गलती हुई है? या फिर कुछ और कारण है? इस मामले की जांच कर गलती सुधार करने की आवश्यकता है।
आदेश के बाद परिवार को मानसिक परेशानी का सामना —
एडीएम न्यायिक के आदेश के बाद हर्षित सिंह के परिवार को क्या फर्क पड़ेगा? हालांकि, हर्षित सिंह की मौत हो चुकी है, लेकिन इस आदेश के बाद उनके परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़ा करता है। इससे यह साबित होता है कि समाज में किस व्यक्ति से खतरा है उसकी सही से पहचान नहीं की जा रही है।
हांलाकि एडीएम न्यायिक का कहना है कि पुलिस की दुबारा रिपोर्ट आने पर आदेश निरस्त कर दिया जाएगा ।
बाबा की रिपोर्ट —










