खबर लिखने से प्रशासनिक प्रताड़ना झेलने वाले पत्रकारों को अब सर्वोच्च सुरक्षा–
Newsalert9
कुशीनगर
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। यह फैसला पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शीर्ष अदालत ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को उनके पोस्ट के संबंध में गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा की जाती है और लोकतांत्रिक देशों में अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है।कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
क्या था मामला—-
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने तथ्यों के साथ उत्तर प्रदेश में प्रमुख पदों पर एक खास जाति के अधिकारियों की नियुक्ति का आरोप लगाया था।सपा सरकार में भी जाति विशेष को तरजीह की बात कही थी।इसके बाद, उनके खिलाफ लखनऊ में एक एफआईआर दर्ज की गी।इस पर अभिषेक उपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
यह फैसला पत्रकारों के लिए एतिहासिक है—-
यह फैसला पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मामलों को रोकने में मदद करेगा।
बाबा की रिपोर्ट—










