नर देवी मंदिर में काटी गयी थी अल्हा -रूदल के पिता का सिर —

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कुशीनगर

जानिए माता नर देवी मंदिर की प्रसिद्धि व इतिहास —

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आस्था

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के  जंगलो में कई प्रसिद्ध देवी मंदिर स्थापित है जो सदियो से लोगों के आस्था के रूप में विद्यमान है। यह शक्ति स्थल अपने में अलग अलग इतिहास समेटे हुए हैं।इसी मे एक अति प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर नर देवी है।मंदिर का इतिहास अल्हा- उदल से जुड़ा है।

 विहार के वाल्मीकि नगर (भैंसालोटन) के पास जंगल के सुरम्य वादियों में स्थापित देवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुंओ की भीड़ उमड़ रही है।

कालांतर में नरबलि देने की प्रथा के चलते नरदेवी नाम पड़ा था,लेकिन अब  यहाँ मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु प्रतिकात्मक रूप से कबूतर  छोड़ते है और मुर्गे बकरे की बलि दी जाती है।

 नेपाल विहार यूपी के लिए अत्यंत श्रद्धा के केन्द्र नर देवीमंदिर का इतिहास काफी चमत्कारिक रहा है।

 जनश्रुति व पुजारी बताते हैं कि लोग गीत आल्हा के नायक आल्हा व ऊदल के पिता जासर यहाँ रहते थे उनका बावन किला भी था जिसका अवशेष पहाड़ियों पर अभी भी है।राजा जासर, देवी के परम भक्त थे लेकिन इनके भाइ व भतीजे इनसे द्वेष रखते थे ,एक दिन राजा जब देवी के आराधना में मग्न थे तभी षड्यंत्र करते हुए राजा के भतीजे झगरू पहुंचा और शोर मचाते हुए जासर का ध्यान भंग कर दिया ।और जासर का सीर काटकर नरबलि दे दिया और राज्य पर कब्जा कर लिया। बालक आल्हा व ऊदल को उनकी माँ किसी तरह जान बचाकर लेकर मायके पहुँचकर शरण ली।बाद  में आल्हा ऊदल जब बड़े हुए तो पिता के हत्यारो की बलि देवी के सामने देकर  बदला पूरा कर  राज्य वापस लिया था। दोनो भाइ देवी के अनन्य भक्त थे। उसी काल से इस मंदिर में लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।

बाबा की रिपोर्ट–

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Author: News Alert 9

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