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कुशीनगर

मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के रख-रखाव की जिम्मेदारी महराजगंज सिचाई विभाग के अधीन है। सिंचाई विभाग महराजगंज द्वारा मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। ट्रेक्टर ट्राली से मिट्टी मंगाकर बोरी में भरकर पानी का बहाव रोकने की कोशिश चल रही है। मौके पर तहसीलदार खडडा महेश कुमार, महराजगंज के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार वर्मा, सहायक अभियंता इमरान आलम मौके पर कैंप किए हुए हैं।
जान लिजिए गैनही ड्रेन के वारे में–
यह बरसाती ड्रेन नेपाल सीमा के पास से निकली हुई है जो महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील के कइ गाँव से बहती है ,यह मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की बायीं तरफ सामानांतर बहते हुए कुशीनगर सीमा के खडडा क्षेत्र में प्रवेश करती है,यहाँ गंडक नदी पर बने छितौनी तटबंध व नहर पटरी के बीच से होकर गुजरते हुए, खडडा क्षेत्र के तुर्कहा नाले में होते हुए नौतार तटबंध के आगे गंडक नदी में मिल जाती है। इस ड्रेन का नाम क्षेत्रों के हिसाब से बदलता रहता है। गैनही गाँव के पास इसे गैनही ड्रेन कहा जाता है।
पिछले बरसात में गंडक नदी में पानी ज्यादा होने व ड्रेन में कम होने से हुए रिसाव से छितौनी तटबंध किलोमीटर 0.200 पर टूट गया था, इसके पहले भी इसके वजह से बांध टूट गया था। ड्रेन की वजह से नहर की पटरी आधा दर्जन बार टूट चुकी है। पटरी व तटबंध के मरम्मत में सरकार को करोड़ों रूपये खर्च करने पड़ते हैं। अभियंताओ के मुताबिक नहर में पानी नहीं होने और ड्रेन मे पानी ज्यादा होने से नहर पटरी पर दबाव बना और रिसाव से पटरी टूट गयी।नहर नीचे है और ड्रेन उपर है इस लिए पानी का प्रशर बढा । बार बार नहर की पटरी व तटबंध तोड़ने के लिए बदनाम ड्रेन को नियोजित नहीं किया जाएगा तबतक यह दुश्वारी उठानी पड़ेगी।
बाबा की रिपोर्ट—–










