Newsalert9 (कुशीनगर)
बाबा की रिपोर्ट—
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने धर्मांतरण करने वाले दलितों को मिलने वाले आरक्षण का विरोध किया है। आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने बताया कि संविधान में अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों को रखा गया है, जिसमें हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी भी दूसरे धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है ¹।
जांच आयोग का गठन
केंद्र सरकार ने 2022 में भारत के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्ण की अगुवाई में जांच आयोग गठित किया था। आयोग का गठन इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया था कि जो लोग धर्म बदल चुके हैं ऐसे अनुसूचित समुदाय से आने वाले लोगों को एससी कैटेगरी का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं।
जांच आयोग को मिला एक साल का विस्तार
जांच आयोग को पहले 10 अक्टूबर 2024 तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश था, लेकिन अब केंद्र ने जांच समिति को एक साल बढ़ा दिया है। आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने बताया है कि आरक्षण जाति के आधारित है, और धर्म बदलने से पहले जो हिंदू होते हैं वो धर्म बदलने के बाद मुस्लिम, ईसाई बन जाते हैं, जिसकी व्याख्या संविधान में नहीं है।
धर्मांतरण और आरक्षण
मकवाना ने कहा है कि अगर धर्मांतरण करने वाले लोगों को एससी का दर्जा दिया जाता है तो ये बाबा साहब के प्रयासों का दुरुपयोग होगा, और यह एससी समुदाय के लोगों के साथ धोखा होगा। हालांकि, जो लोग हिंदू धर्म से बौद्ध और सिख में धर्मांतरण करने वाले लोगों को आरक्षण मिलता रहेगा।










