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हिन्दी हमारी अस्मिता का प्रतीक है –डाक्टर देवेन्द्र मणि

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हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय इन्टरमीडिएट कालेज भुजवली प्रमुख  में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में विविध कार्यक्रम हुए । राजभाषा के विषय में छात्रों को विस्तार से जानकारी दी गयी ।

प्रधानाचार्य डाक्टर देवेन्द्र मणि ने संबोधित करते हुए कहा–

हिन्दी केवल भारत की राजभाषा ही नहीं  अपितु हिन्दुस्तान की अस्मिता का प्रतीक भी है, जो बहुसंस्कृति वाले इस विशाल देश को आपस में जोड़ रखा है।
14 सितम्बर 1949 को भारतीय संविधान ने हिन्दी को भारत की राजभाषा के रुप में मान्यता दी थी,जो स्वतन्त्र और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के लिए ऐतिहासिक कदम था।पूरे विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हमारी हिन्दी है। पूरी दुनिया इस महान भाषा को सीखने हेतु लालायित है तथा इसका तेजी से प्रसार हो रहा है।सोशल मिडिया ने हिन्दी को नया आयाम दिया है। अब हिन्दी का प्रयोग विज्ञान ,कानून, सहित तमाम क्षेत्रों में किया जा रहा है। गुगल ने भी हिन्दी की महत्ता को स्वीकार किया है। वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी विश्व कि सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा में अग्रणी होगी।

अध्यक्षता कर रहे प्रवक्ता राघव शरण पांडेय ने कहा–

हिन्दी पर हमे गर्व है यह भाषा करोड़ो लोगों के दिल दिमाग में रचा बसा है,यह जन जन की भाषा है।

कविता के माध्यम से हिन्दी की महत्ता बताइ गयी ।

प्रवक्ता सत्येन्द्र मिश्र ने कविता के माध्यम से हिन्दी की सरलता की अभिव्यक्ति करते हुए ,इसके इतिहास ,वर्तमान पर प्रकाश डाला । राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी संजय पाण्डेय ने संचालन किया।

छात्रों ने मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दी की उपलब्धि गिनायी–

इस अवसर पर निर्भय मिश्र, पल्लवी मिश्रा,अजय सिंह, रामस्वरूप पांडेय, प्रदीप कुमार, अभिषेक पाण्डेय, कमलेश शर्मा, मनीष राय , हरगोबिंद सिंह , उत्तम जी आदि प्रमुख रुप से उपस्थित रहे।

News Alert 9
Author: News Alert 9

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