बाढ तो चला गया,, लेकिन पीछे छोड़ गया “तबाही” का मंजर—-

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गृहस्थी पटरी पर लाने  की जद्दोजहद मे बाढ प्रभावित लोग—

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कुशीनगर

कुशीनगर के खडडा क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर ,सालिकपुर ,महदेवा गाँव में बाढ का पानी उतरने के बाद लोगों को बदबूदार कीचड़, कीड़े-मकोड़े, प्रदूषित मलवा और जहरीले सर्प का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ की विभीषिका—

तीन दिन पहले वाल्मीकि बैराज से 5,65,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से भैसहा गेज स्थल पर जलस्तर खतरे के निशान से 54 सेमी उपर चला गया था, लेकिन अब इसमें कमी आ गई है।  जलस्तर भैसहा गेज पर खतरे के निशान से नीचे आ गया है।

आबादी पर प्रभाव—

लगभग 35 हजार आबादी सीधे प्रभावित हुई थी, जिन्हें उंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए छोटी नाव से जद्दोजहद करनी पड़ी थी। लोगों के घरों में रखा सामान खराब हो गया है, और कई लोग घरों के छतों और मचानों पर शरण लिए हुए थे।

लोगो की दुश्वारी बढी—-

रविवार की रात्रि में पानी कम होने लगा और सोमवार की दोपहर होते होते अधिकांश घरों से पानी निकल गया।मंगलवार को कुछ हालत और सुधरा है। गाँव में निचले हिस्से में कुछ घरों में पानी इकट्ठा है। अधिकांश पानी  निकल कर नीचले हिस्से में चला गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ के पानी के साथ बदबूदार कीचड़ भर गया है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है और जहरीले सांप मिल रहे हैं। लोग अपने घरों को साफ करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जिंदगी भर की कमाई एक झटके में बर्बाद हो गई है।

बाढ से सड़क व फसल बर्बाद—-

फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई जगह सड़कें तोड़ दी गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले वाली बाढ में गन्ना और धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था, लेकिन इस बाढ से सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है।

तहसील प्रशासन का दावा फेल—-

तहसील प्रशासन का बाढ पूर्व सभी तैयारी पूर्ण करने का दावा पूरी तरह फेल हो गया। लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखने, चारा और दवा उपलब्ध कराने समेत कई व्यवस्थाएं नहीं हो पाईं। लोगों ने कहा कि समय रहते तहसील प्रसाशन कोई इन्तजाम नहीं कर पाया था।

बाबा की रिपोर्ट —-

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Author: News Alert 9

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